त्योहारी सीजन से पहले रिटेल बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगस्त में करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंची चीनी की रिटेल कीमत अब लगभग 58.50 रुपये प्रति किलो रह गई है। इस तरह हालिया उच्च स्तर की तुलना में रिटेल कीमत में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है।
चीनी की कीमतों में गिरावट के साथ केंद्र सरकार ने बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया है। अब निर्धारित श्रेणी के बड़े उपभोक्ता 30 दिनों की खपत तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं। पहले यह सीमा 15 दिनों की खपत तक थी।
हालांकि, अतिरिक्त 15 दिनों के स्टॉक के लिए सरकार ने अलग शर्त तय की है। 15 दिनों से अधिक का स्टॉक केवल निर्धारित व्यवस्था के तहत आयात की गई चीनी से रखा जा सकेगा। घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी के मामले में 15 दिनों की खपत की सीमा बरकरार रहेगी उपलब्ध सरकारी जानकारी के मुताबिक अगस्त में चीनी की रिटेल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और कीमत लगभग 58.50 रुपये प्रति किलो पर आ गई है।
इस हिसाब से अगस्त के करीब 65 रुपये प्रति किलो के स्तर से तुलना करें तो उपभोक्ताओं को प्रति किलो लगभग 6.50 रुपये की कीमत राहत मिली है। कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है और बाजार में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। चीनी का इस्तेमाल घरेलू खपत के अलावा मिठाई, बिस्किट, कन्फेक्शनरी, शीतल पेय और अन्य खाद्य एवं पेय उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है।
सरकार के अनुसार चीनी की मिल कीमत यानी एक्स-मिल प्राइस में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। एक्स-मिल कीमत वह कीमत है जिस पर चीनी मिल से चीनी आगे के कारोबार के लिए निकलती है। सरकार ने यह भी कहा है कि एक्स-मिल कीमत में आई गिरावट की तुलना में रिटेल कीमत में कमी कम रही है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी कारोबार से जुड़े थोक विक्रेताओं और रिटेल कारोबारियों से कीमतों में आई गिरावट का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने की अपील की है।
इसका मतलब यह है कि सरकार ने थोक और रिटेल कारोबार से जुड़े कारोबारियों से बाजार में कम हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने को कहा है। त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा में बदलाव किया है। अब ऐसे बड़े उपभोक्ता 30 दिनों की खपत तक चीनी का स्टॉक रख सकते हैं। इससे पहले उनके लिए यह सीमा 15 दिनों की खपत तक निर्धारित थी। यह बदलाव खास तौर पर उन कारोबारियों और कंपनियों से जुड़ा है जो बड़ी मात्रा में चीनी को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
यह नियम उन बड़े उपभोक्ताओं पर लागू होता है जो हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर करते हैं। इस श्रेणी में कई प्रकार के खाद्य एवं पेय कारोबार शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से मिठाई बनाने वाले कारोबारी, कन्फेक्शनरी कंपनियां, बिस्किट निर्माता, शीतल पेय कंपनियां, अन्य खाद्य एवं पेय कंपनियां शामिल हैं। इन कारोबारों में चीनी उत्पादन प्रक्रिया में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होती है। ऐसे में स्टॉक सीमा में बदलाव का सीधा संबंध उनके निर्धारित खपत स्तर और स्टॉक प्रबंधन से है।
सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं को 30 दिनों की खपत तक स्टॉक रखने की अनुमति दी है, लेकिन अतिरिक्त 15 दिनों के स्टॉक के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त रखी गई है। 15 दिनों से अधिक का स्टॉक केवल आयातित चीनी के माध्यम से रखा जा सकेगा। इसके लिए चीनी का आयात एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम या टैरिफ रेट कोटा के तहत होना जरूरी है।
दूसरे शब्दों में, घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी को लेकर पहले वाली 15 दिनों की स्टॉक सीमा लागू रहेगी। अतिरिक्त 15 दिनों के स्टॉक के लिए घरेलू बाजार से खरीदी गई चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था के तहत 30 दिनों की कुल स्टॉक सीमा और उसके भीतर घरेलू तथा आयातित चीनी से जुड़ी शर्तों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
बड़े उपभोक्ताओं के लिए केवल स्टॉक सीमा में बदलाव ही नहीं किया गया है, बल्कि स्टॉक की निगरानी का भी प्रावधान रखा गया है। निर्धारित बड़े उपभोक्ताओं को हर शुक्रवार खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने चीनी स्टॉक की जानकारी देनी होगी। इस व्यवस्था के जरिए विभाग बाजार में चीनी की उपलब्धता पर नजर रखेगा। साथ ही स्टॉक की नियमित जानकारी मिलने से बाजार में चीनी की उपलब्धता और बड़े उपभोक्ताओं के पास मौजूद स्टॉक की निगरानी की जा सकेगी। स्टॉक सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि 30 दिनों की कुल सीमा का मतलब घरेलू बाजार से 30 दिनों की खपत के बराबर चीनी खरीदने की अनुमति नहीं है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार घरेलू खुले बाजार से खरीदी गई चीनी के लिए स्टॉक की सीमा 15 दिनों की खपत तक ही रहेगी। इसके ऊपर के अतिरिक्त 15 दिनों के स्टॉक के लिए निर्धारित नियमों के तहत आयातित चीनी जरूरी होगी। इसलिए बड़े उपभोक्ताओं के लिए संशोधित व्यवस्था में कुल 30 दिनों तक स्टॉक रखने की अनुमति है, लेकिन अतिरिक्त मात्रा के स्रोत को लेकर सरकार ने शर्त तय की है।
चीनी की कीमतों में गिरावट और स्टॉक सीमा में बदलाव दो अलग-अलग पहलू हैं। रिटेल बाजार में चीनी की कीमत अगस्त के करीब 65 रुपये प्रति किलो के स्तर से घटकर लगभग 58.50 रुपये प्रति किलो हुई है। वहीं, सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा 15 से बढ़ाकर 30 दिन की है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना बताई गई है। सरकार के अनुसार मिल स्तर पर चीनी की कीमत में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। इसके मुकाबले रिटेल कीमत में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी कारोबार से जुड़े थोक विक्रेताओं और रिटेल कारोबारियों से कहा है कि कीमतों में आई गिरावट का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया जाए। इस अपील का संदर्भ एक्स-मिल कीमत में आई करीब 25 प्रतिशत की गिरावट से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकार का कहना है कि मिल कीमत में हुई कमी की तुलना में रिटेल कीमत में गिरावट कम रही है। ऐसे में थोक और रिटेल स्तर पर कीमतों में कमी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
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