दुनिया में पेट्रोल-डीजल महंगा, लेकिन भारत में 4 साल में घटी कीमतें; सरकार ने बताया कारण

पाकिस्तान, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में बढ़े ईंधन के दाम, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने टैक्स कटौती और सरकारी कदमों को बताया वजह।

 

दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन भारत में पिछले चार वर्षों के दौरान ईंधन की कीमतों में 3.1 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस संबंध में आंकड़े साझा करते हुए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी।

 

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, मई 2022 से मई 2026 के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में श्रीलंका में 66 प्रतिशत, फ्रांस में 47 प्रतिशत, इटली में 46 प्रतिशत और अमेरिका में 35 प्रतिशत तक दाम बढ़े। इसके विपरीत भारत में इसी अवधि के दौरान ईंधन की कीमतों में 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

 

सरकार के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसके बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने समय-समय पर कई कदम उठाए। सरकार ने पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया।

 

सरकार के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसके लिए टैक्स कटौती के माध्यम से हर साल एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व बोझ उठाया गया। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अंडर रिकवरी का सामना किया, ताकि खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

 

सरकार ने खुदरा पेट्रोल पंपों से औद्योगिक और थोक खरीदारों द्वारा डीजल की बड़े पैमाने पर खरीद और संभावित कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर डीजल की सीमा तय की है। इसका उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


 

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