रामगोपाल हत्याकांड: महराजगंज हिंसा से अदालत के फैसले तक पूरी रिपोर्ट

Bahraich Voilence: दुर्गा विसर्जन जुलूस में विवाद से शुरू हुआ रामगोपाल हत्याकांड कैसे बड़े पैमाने पर हिंसा में बदल गया और एक वर्ष की अदालती प्रक्रिया के बाद फैसले तक पहुंचा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।


>महराजगंज बाजार में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते-देखते बड़े पैमाने पर हिंसा में बदल गया। पथराव, फायरिंग और आगजनी के बीच रेहुआ मंसूर निवासी रामगोपाल मिश्रा की हत्या हो गई। करीब एक वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 9 अक्तूबर 2025 को आरोप तय कर दिए, जिसके बाद 11 अक्तूबर को फैसला सुनाया गया।


>घटना 13 अक्तूबर की शाम 6 बजे तब शुरू हुई जब महराजगंज कस्बे में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस गुजर रहा था। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने डीजे बंद करने की मांग की, जिस पर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। थोड़ी ही देर में पथराव, आगजनी और 20 से अधिक राउंड फायरिंग की गई।


>इसी के बीच रामगोपाल मिश्रा, अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़ गए और वहां लगे झंडे को उतारकर भगवा झंडा फहरा दिया। आरोप है कि इसके बाद अब्दुल हमीद, उसके बेटे सरफराज और अन्य लोगों ने रामगोपाल को घर के अंदर खींच लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने उनकी पिटाई की, पैरों के नाखून उखाड़े और बाद में गोली मार दी। लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।


>रामगोपाल की मौत की खबर फैलते ही कस्बे में तनाव बढ़ गया। जुलूस रोक दिया गया और रातभर विरोध जारी रहा। डीएम मोनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला मौके पर पहुंचीं और भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इसके बावजूद अगले दिन सुबह फिर हिंसा भड़क उठी।


>भीड़ ने मृतक का शव लेकर प्रदर्शन किया और पुलिस की समझाइश के बाद शव घर ले जाया गया, लेकिन उग्र भीड़ ने महसी तहसील क्षेत्र में आगजनी शुरू कर दी। एक बाइक शोरूम और निजी अस्पताल को आग के हवाले कर दिया गया। हालात नियंत्रित करने के लिए पांच थानों की फोर्स और दो बटालियन पीएसी तैनात की गईं।


>स्थिति गंभीर होने पर एसटीएफ चीफ और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश बहराइच पहुंचे। उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की और न मानने पर पिस्टल लेकर भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की।


>हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान के मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चालान दाखिल किया। करीब एक वर्ष तक अदालत में गवाहों, पीड़ित परिवार और पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए। आरोपियों ने अपने बचाव में विभिन्न दलीलें पेश कीं।


>9 अक्तूबर 2025 को अदालत ने सबूतों और गवाहियों के आधार पर आरोप तय किए। इसके दो दिन बाद 11 अक्तूबर को मामले में फैसला सुना दिया गया।


 

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