डेमोग्राफी बदलाव पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम, हिंदू पलायन को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

संभल हिंसा पर बनी कमेटी ने सीएम योगी को 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी, जिसमें डेमोग्राफी बदलाव और दंगों का पूरा लेखा-जोखा शामिल है। इस खुलासे पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हिंदुओं के पलायन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा—संभल आजादी के बाद भी कुछ लोगों से आजाद नहीं हो पाया।
News Desk 28 Aug 2025, 03:10 AM 1 min read
डेमोग्राफी बदलाव पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम, हिंदू पलायन को बताया दुर्भाग्यपूर्ण


>उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के बाद गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट लगभग 450 पन्नों की है, जिसमें पुराने दंगों की तारीखों, जनहानि, प्रशासनिक कार्रवाई और हिंसा के बाद की परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।


>इस रिपोर्ट के बाद धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने संभल की बदलती डेमोग्राफी और हिंदुओं के पलायन पर अपनी गंभीर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “भारत की आजादी के बाद से चला आ रहा अन्याय” करार दिया।


>एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा:


    >
  • “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज संभल में हिंदू आबादी मात्र 15 फीसदी रह गई है। यह स्थिति किसी एक दिन में नहीं बनी बल्कि आजादी के बाद से धीरे-धीरे तैयार की गई।”

  • उन्होंने कहा कि 1947 में देश को अंग्रेजों से तो आजादी मिल गई, लेकिन संभल का इलाका कुछ खास लोगों से आजाद नहीं हो पाया। यहां ऐसे लोग सत्ता में आए जो भारत की आजादी के नायकों को नहीं बल्कि मोहम्मद अली जिन्ना को अपना आदर्श मानते थे।

  • उनके अनुसार, इन्हीं कारणों से बार-बार दंगे हुए और धीरे-धीरे हिंदुओं का पलायन शुरू हो गया।


>आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि संभल का महत्व सिर्फ राजनीतिक ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी है। पुराणों में वर्णन है कि भगवान विष्णु का अंतिम अवतार श्री कल्कि अवतार इसी धरती पर होगा। इसी आधार पर वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां श्री कल्कि धाम का शिलान्यास किया था।


>उन्होंने आरोप लगाया कि जब डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क सत्ता में थे, तब उन्होंने कल्कि धाम निर्माण कार्य पर रोक लगाने की कोशिश की थी। आचार्य ने इसे धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करार दिया। 450 पन्नों की यह रिपोर्ट केवल 2024 की हिंसा ही नहीं बल्कि पिछले कई दशकों के दंगों, घटनाओं और सामाजिक बदलावों का लेखाजोखा पेश करती है। इसमें डेमोग्राफिक बदलाव को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। अब देखना होगा कि योगी सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कदम उठाती है।

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