अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा महिलाओं से संबंधित एक कथित नियम को लेकर देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने आपत्ति जताई है। जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक ने वीडियो बयान जारी कर महिलाओं पर सख्ती और हिंसा को इस्लाम से जोड़ने को गलत बताया।
मौलाना कारी इसहाक गोरा ने अपने बयान में कहा कि हाल में तालिबान से जुड़ा एक कथित नियम सामने आया है, जिसमें पति को पत्नी की “गलती” पर शारीरिक दंड देने की अनुमति का दावा किया गया है, बशर्ते गंभीर चोट न पहुंचे। उन्होंने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सोच को मजहब-ए-इस्लाम से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम रहमत, इंसाफ और आपसी सम्मान का दीन है। घरेलू जीवन में नरमी, सब्र और सद्भाव को मूल शिक्षा बताया गया है। महिलाओं को अपमानित करना या उनके साथ हिंसा करना इस्लामी तालीम का हिस्सा नहीं हो सकता।
मौलाना ने पैगम्बर मोहम्मद के कथनों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के साथ अच्छे व्यवहार की ताकीद की गई है और निकाह को सुकून व रहमत का रिश्ता बताया गया है। उन्होंने उलेमा और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे दीन की व्याख्या कुरआन और सुन्नत के आधार पर करें।
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