UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी थोड़ा समय है लेकिन भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। भाजपा ने इसके लिए पूरी रणनीति भी तैयार कर ली है। दीपावली के बाद नवंबर और दिसंबर में प्रदेशव्यापी तीन-स्तरीय चुनावी अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अहम होगी। इन अभियानों के पीछे पार्टी का मकसद विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना और जनता के बीच अपनी पकड़ बढ़ाना है।
भाजपा की रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में विशाल जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इन रैलियों के माध्यम से पार्टी सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर जनता तक पहुंचेगी। साथ ही इन रैलियों से कार्यकर्ताओं में चुनावी उत्साह भी बढ़ेगा। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संगठन और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। वे अलग-अलग जनपदों में जनसभाएं और जिला स्तर पर बूथ सम्मेलन करेंगे। अमित शाह के चुनावी प्रबंधनों में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर फोकस रहेगा।
इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी यूपी विधानसभा चुनाव को लेकिर सक्रिय होंगे। नितिन नबीन यूपी में विधानसभा स्तर पर बैठकों और प्रचार अभियानों का नेतृत्व करेंगे। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिला स्तर पर रैलियां और जनसभाओं को संबोधित करेंगे। भाजपा की योजना अपने वरिष्ठ नेताओं के जरिए प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों तक पहुंचने की है। बीजेपी के इस अभियान में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। 20 नवंबर के बाद अभियान में तेजी आ सकती है। इसके तहत बूथ कार्यकर्ता और माइक्रो टीम कम से कम 50 परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाएं और उपलब्धियों के बारे में जानकारी देगी।
इसके अलावा भाजपा का फोकस विधानसभा चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर भी रहेगा और नए मतदाताओं से संपर्क करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जनसभाओं और रैलियों के साथ ही भाजपा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी पकड़ तेज करेगी। स्थानीय कार्यकर्ताओं को कार्यक्रमों की तस्वीरें और अपडेट सोशल मीडिया पर साझा करने के निर्देश दिए जाएंगे। पार्टी की इस रणनीति को यूपी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने की बड़ी कवायद माना जा रहा है।
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