नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद अब यह विवाद राजनीतिक गलियारों से निकलकर धार्मिक संगठनों तक पहुंच गया है। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के इंद्रप्रस्थ प्रांत ने शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'सद्बुद्धि हवन' आयोजित करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि यह कार्यक्रम संसद परिसर में संतों के वेश में प्रस्तुत की गई नाटिका से आहत संत समाज के सम्मान में आयोजित किया जा रहा है।
विहिप के अनुसार, यह हवन दोपहर 12 बजे शुरू होगा और वैदिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा। संगठन ने इसे किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय संत समाज के सम्मान और सामाजिक सद्भाव से जुड़ी पहल बताया है।
मानसून सत्र के दौरान संसद भवन के मकर द्वार के बाहर विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी के वेश में नजर आए। इसके बाद विपक्ष के अन्य सांसदों ने उन्हें प्रतीकात्मक रूप से दान दिया और उन्होंने दानपेटी लेकर भागने का अभिनय किया, जबकि अन्य सांसदों ने उन्हें रोकने का नाटक किया।
विपक्ष ने इस प्रदर्शन को राम मंदिर चढ़ावा मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया। वहीं भारतीय जनता पार्टी और कई धार्मिक संगठनों ने इस प्रदर्शन पर आपत्ति जताते हुए इसे संत समाज और धार्मिक परंपराओं के प्रति असम्मानजनक बताया।
विश्व हिन्दू परिषद के इंद्रप्रस्थ प्रांत के पदाधिकारियों का कहना है कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज का विशेष स्थान है और किसी भी राजनीतिक विरोध के लिए संतों के स्वरूप का उपयोग उचित नहीं माना जा सकता।
विहिप के प्रांत महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा,
"राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जांच होनी चाहिए, लेकिन इस बहाने संतों की गरिमा और सनातन परंपरा का मजाक नहीं बनाया जा सकता। यह हवन इसी भावना का प्रतीक बनेगा।"
संगठन के अनुसार, हवन के माध्यम से उन लोगों के लिए सद्बुद्धि और विवेक की प्रार्थना की जाएगी, जिनके कार्यों से संत समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। विहिप ने श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की है।
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की राशि के कथित गबन का मामला जून 2026 में सामने आया था। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने दानपेटियों से प्राप्त धनराशि में अनियमितता की।
जांच एजेंसियों को उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई के दौरान लगभग 80 लाख रुपये बरामद किए गए तथा इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दिया।
चढ़ावा मामले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण को एक आपराधिक जांच का विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने मामले को राजनीतिक विवाद का रूप देने से बचने की भी बात कही थी। जांच एजेंसियां फिलहाल मामले की जांच कर रही हैं और इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष इस मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और कई सनातन संगठनों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी रहने के दौरान धार्मिक प्रतीकों और संत समाज को राजनीतिक विरोध का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। इसी घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाला विहिप का 'सद्बुद्धि हवन' इस पूरे विवाद का नया अध्याय बन गया है।
विहिप के अनुसार, कार्यक्रम पूरी तरह वैदिक परंपराओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि संत समाज के सम्मान की भावना व्यक्त करना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रार्थना करना है। संगठन ने कहा कि धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक विमर्श के दौरान सभी पक्षों को मर्यादा और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
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