>उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए मोटे यानी नॉन-हाइब्रिड धान की रिकवरी में 1 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। यह फैसला न केवल किसानों की जेब में अतिरिक्त रकम डालेगा बल्कि प्रदेश की करीब 2,000 राइस मिलों को भी मजबूती देगा। इससे धान उत्पादक किसानों को मंडी में अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
>गन्ना किसानों को राहत देने के बाद अब सरकार ने धान उत्पादक किसानों को भी खुशखबरी दी है। इस निर्णय से प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसान सीधे लाभान्वित होंगे, जबकि हाइब्रिड धान पर पहले से लागू 3% रिकवरी छूट जारी रहेगी।
>वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लोकभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार मिलर्स को धान की कुटाई के बदले 67% कस्टम मिल्ड राइस (CMR) जमा करना होता है। पिछले कुछ वर्षों में राइस मिलों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि वास्तविक रिकवरी अनुपात किसानों और मिलर्स के लिए चुनौती बन रहा था। रिकवरी कम होने से किसानों को कम कीमत और मिलर्स को नुकसान उठाना पड़ता था। ऐसे में यह नीति बदलाव कृषि अर्थव्यवस्था के लिए राहत साबित होगी।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें