>वाराणसी - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वाराणसी के वसंत महिला महाविद्यालय में आयोजित ‘बिरसा मुंडा राष्ट्रीय संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए समाज में नफरत और जातीय संघर्ष फैलाने वालों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ तत्व सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर समाज में जातीय जहर घोलने का कार्य कर रहे हैं, जिन्हें पहचानकर कड़ी सजा देना समय की मांग है।
>मुख्यमंत्री ने कहा, “जहां संवाद बाधित होता है, वहीं संघर्ष की नींव पड़ती है। संवाद की कमी ही पिछली सरकारों की सबसे बड़ी विफलता रही।” उन्होंने बताया कि 2017 से पहले तक कई जनजातीय गांवों को राजस्व ग्राम तक नहीं माना गया था। आज वही गांव शासन की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।
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>सनातन परंपरा की आत्मा है जनजातीय समाज
>योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज को भारत की सनातन परंपरा की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम से लेकर शिवाजी महाराज तक हर युग में आदिवासी समाज ने राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई। बिरसा मुंडा को उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का उत्प्रेरक करार देते हुए कहा कि उन्होंने युवावस्था में ही अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका था।
>फर्जी 'भगवा' का खुलासा: आगजनी की आड़ में जातीय उकसावे की साजिश
>सीएम योगी ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए बताया कि "एक व्यक्ति भगवा गमछा डालकर 'या अल्लाह' चिल्लाते हुए आगजनी करता मिला।" जांच में पता चला कि यह सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों को बदनाम करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज को राष्ट्र से तोड़ने की कोशिश की।
>वेदों को जीने वाला समाज: मंदिर जाए या न जाए, फिर भी हिंदू है
>मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू वह है जो वेदों को माने और वह भी जो न माने। चार्वाक और बुद्ध जैसे विचारकों को उन्होंने उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज वेदों की शिक्षाओं को जीता है, न कि केवल उनकी बात करता है।
>संवेदनशील शासन और संवाद से बदलाव की शुरुआत
>मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद उनकी सरकार ने राशन कार्ड, जमीन के पट्टे, पेंशन जैसी सुविधाओं के माध्यम से जनजातीय समाज को शासन की मुख्यधारा से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि 1947 से लेकर 2017 तक जनजातीय गांवों को मताधिकार तक नहीं दिया गया, जो कि शर्मनाक है।
>पर्यावरण और परंपरा का संतुलन
>कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने वसंत महिला महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने हमेशा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जिया है, यही वेदों की सच्ची व्याख्या है।
>राष्ट्रीय एकता के लिए सजगता आवश्यक
>सीएम योगी ने कहा कि समाज को तोड़ने वाले तत्व केवल सोशल मीडिया पर नहीं, ज़मीनी स्तर पर भी सक्रिय हैं। उन्होंने जौनपुर की घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो।
>प्रधानमंत्री मोदी और जनजातीय गौरव दिवस का उल्लेख
>मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित जनजातीय गौरव दिवस (15 नवम्बर) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न सिर्फ इतिहास को सम्मान देने की पहल है, बल्कि जनजातीय समाज के साथ संवाद और विश्वास बहाली का प्रयास भी है।
>संगोष्ठी में शामिल रहे गणमान्य अतिथि
>इस मौके पर पद्मश्री अशोक भगत, स्वतंत्र देव सिंह, अनिल राजभर, रविन्द्र जायसवाल, नीलकंठ तिवारी, सुशील सिंह सहित कई विधायक, मंत्री और छात्राएं उपस्थित रहीं।
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