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अखिलेश यादव का किसानों से ऐलान, 24-48 घंटे में गन्ने का भुगतान

अखिलेश यादव ने किसानों से संवाद में गन्ना भुगतान, डीएपी, सिंचाई, बिजली, फसल नुकसान और आलू खरीद समेत कई मुद्दों पर अपनी योजनाएं बताईं।
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Bureau News Desk
30 Sep 2026
04:21 PM
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अखिलेश यादव का किसानों से ऐलान, 24-48 घंटे में गन्ने का भुगतान
हाइलाइट्स
अखिलेश यादव ने गन्ना किसानों के भुगतान को 24 से 48 घंटे में खाते तक पहुंचाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि केवल भुगतान जारी होना नहीं, बल्कि किसान के खाते में पैसा पहुंचना भुगतान माना जाएगा।
किसानों के लिए मुफ्त सिंचाई और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की बात कही।
डीएपी, खाद, कीटनाशक, कृषि मशीनों की लागत और फसल नुकसान के मुद्दे उठाए।

लखनऊ, 30 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किसानों के बीच पहुंचकर खेती की लागत, फसल की कीमत और भुगतान से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। संवाद के दौरान उन्होंने गन्ना किसानों के भुगतान से लेकर खाद-डीएपी, सिंचाई, बिजली, फसल नुकसान और आलू खरीद तक कई विषयों का जिक्र किया।

किसानों के लिए उनके प्रस्तावों में सबसे प्रमुख गन्ने के भुगतान की समयसीमा रही। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो गन्ने का भुगतान 24 से 48 घंटे के भीतर किसान के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने भुगतान की परिभाषा को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल भुगतान जारी कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसान के खाते में रकम पहुंचना ही वास्तविक भुगतान माना जाएगा।

अखिलेश यादव इससे पहले भी गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर 24 घंटे की समयसीमा की बात कर चुके हैं। सितंबर में किसानों से मुलाकात के दौरान उन्होंने 24 घंटे में भुगतान की बात कही थी। बाद के बयानों में उन्होंने 24 से 48 घंटे की समयसीमा का भी उल्लेख किया। किसानों के बीच उन्होंने कहा कि गन्ने की खरीद के बाद भुगतान की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसान को रकम के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। उनका जोर इस बात पर रहा कि भुगतान की प्रक्रिया का अंतिम परिणाम किसान के बैंक खाते में रकम पहुंचने के रूप में दिखाई देना चाहिए।

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किसानों के संवाद में खाद और डीएपी की उपलब्धता का मुद्दा भी सामने आया। अखिलेश यादव ने कहा कि किसान को जरूरत के समय खाद और डीएपी उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने नैनो यूरिया को लेकर किसानों की आपत्तियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार खेती की लागत केवल फसल बोने और काटने तक सीमित नहीं है। खाद, कीटनाशक, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनों की कीमत का सीधा संबंध किसान की कुल लागत से है। ऐसे में कृषि उत्पादन के साथ लागत कम करना भी किसानों से जुड़ी नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना जरूरी है। उनके मुताबिक केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बाजार में किसान को अपनी उपज की उचित कीमत भी मिलनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने कृषि में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मशीनों पर लगने वाले जीएसटी का भी जिक्र किया और कहा कि महंगी मशीनरी का असर खेती की लागत पर पड़ता है। उन्होंने कीटनाशक दवाओं को किसानों के लिए सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की बात कही। उनका कहना था कि खेती में इस्तेमाल होने वाले जरूरी संसाधनों की कीमत नियंत्रित रखने से किसान की लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की बात भी रखी।

किसानों की उपज के मूल्य पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने चीनी और पेट्रोल से मिलने वाले सरकारी राजस्व का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार कुछ क्षेत्रों से लाभ कमा सकती है तो किसानों की उपज के लिए लाभकारी मूल्य की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने किसानों की आय और बाजार व्यवस्था को जोड़ते हुए ऐसी नीतियों की जरूरत बताई जिनका सीधा प्रभाव किसान की आर्थिक स्थिति पर पड़े।

कृषि आय बढ़ाने के लिए अखिलेश यादव ने डेयरी क्षेत्र के विस्तार और सरसों के तेल से जुड़ी योजनाओं की भी बात की। उनके अनुसार किसानों की आय केवल पारंपरिक फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कृषि के साथ पशुपालन, डेयरी और कृषि आधारित दूसरे कारोबार को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं। सरसों की खेती और उससे जुड़े तेल कारोबार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कृषि उत्पादन से जुड़े स्थानीय आर्थिक अवसरों को बढ़ाने की बात कही।

बारिश और जलभराव से फसल को हुए नुकसान का मुद्दा भी किसानों के बीच उठाया गया। अखिलेश यादव ने कहा कि जिस किसान की जितनी फसल खराब हुई है, उसे उसी के अनुसार भरपाई मिलनी चाहिए। उन्होंने केला, गन्ना, धान, दाल और अन्य फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख किया। उनका कहना था कि फसल खराब होने के बाद किसान पर दोहरा आर्थिक दबाव पड़ता है—एक तरफ उत्पादन का नुकसान होता है और दूसरी तरफ अगली खेती के लिए लागत जुटाने की चुनौती रहती है। उन्होंने फसल नुकसान का आकलन और उसके आधार पर मुआवजा देने की व्यवस्था पर जोर दिया।

आलू किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि सरकार खरीद के लिए बजट और व्यवस्था होने की बात करती है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि वास्तव में कितनी मात्रा में आलू खरीदा गया और उसका लाभ कितने किसानों तक पहुंचा। आलू उत्पादन उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में किसानों की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खरीद व्यवस्था, बाजार मूल्य और भंडारण जैसे विषय किसानों की आर्थिक स्थिति से सीधे जुड़े हैं। अखिलेश यादव ने इसी संदर्भ में सरकारी खरीद के वास्तविक परिणामों पर सवाल उठाया।

बारिश के बाद जलभराव का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने नदियों की डी-सिल्टिंग यानी नदियों से गाद निकालने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि नदियों में लगातार गाद जमा होने से उनकी जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है। बारिश के दौरान अधिक पानी आने पर इसका असर बाढ़ और जलभराव के रूप में दिखाई दे सकता है। उन्होंने लखनऊ और गोरखपुर में जलभराव का जिक्र करते हुए जल निकासी व्यवस्था के साथ सड़क और पुलिया निर्माण की डिजाइन पर भी सवाल उठाए।

किसानों के लिए सिंचाई और बिजली को लेकर भी अखिलेश यादव ने अपनी योजना बताई। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा मुफ्त करने की दिशा में काम किया जाएगा। बिजली की लागत को लेकर उन्होंने सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। इसके लिए बिजली उत्पादन बढ़ाने वाली परियोजनाओं का उल्लेख किया। अखिलेश यादव ने अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान किसानों के लिए फीडर सेपरेशन और बिजली उपलब्धता से जुड़े कार्यों का भी जिक्र किया।

अखिलेश यादव ने किसान की आर्थिक स्थिति को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि किसान की आमदनी और रोजगार बढ़ने का असर बाजार पर भी पड़ता है। उनका कहना था कि किसान की आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में खरीदारी और आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करने की भी बात कही।

लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में अखिलेश यादव की मौजूदगी पहले से तय थी। सम्मेलन में राज्यभर से किसानों के शामिल होने और उनकी समस्याओं पर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस कार्यक्रम को किसानों से जुड़े प्रस्तावों और भविष्य की घोषणाओं से भी जोड़ा गया था। किसानों से संवाद के दौरान खाद, सिंचाई, बिजली, फसल का मूल्य, नुकसान की भरपाई और कृषि लागत जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इन मुद्दों को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की किसान-केंद्रित घोषणाओं के संदर्भ में भी रखा गया।

मीडिया के सवालों के जवाब में अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर कहा कि जो गठबंधन पहले था, वही आगे भी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग संपर्क में आना चाहते हैं और इस दिशा में बातचीत चल रही है। सीट बंटवारे के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जिस पक्ष की संख्या अधिक हो, उसे उसी हिसाब से अवसर मिलना चाहिए। 2022 के विधानसभा चुनाव से जुड़े अपने पुराने सवालों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज किया। उन्होंने दूसरे मुद्दों से ध्यान हटने के सवाल के जवाब में भाजपा के बड़े कार्यालय का जिक्र करते हुए पूछा कि इतना बड़ा कार्यालय बनाने की जरूरत क्या थी। भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को पदभार संभाला था।

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को लखनऊ में नामांकन दाखिल किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नामांकन के दौरान अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। धनराज नाथवानी के नामांकन पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी को नई पीढ़ी और नई सोच के व्यक्ति को संसद भेजने का अवसर मिला है। उन्होंने उद्योग जगत से जुड़े लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाने और कारोबार बढ़ाने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोग जरूरी है।

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