सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से अम्बेडकरनगर के देवारांचल क्षेत्र में ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार को भी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही। इसके चलते मांझा कम्हरिया और अराजी देवारा के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई स्थानों पर पानी बंधे तक पहुंच गया है।
फिलहाल गांवों की आबादी में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन जलस्तर बढ़ने के साथ अराजी देवारा गांव के तीन पुरवों के आसपास पानी पहुंचने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीण नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं और संभावित स्थिति को देखते हुए जरूरी सामान तथा पशुओं के चारे को सुरक्षित स्थानों पर रखने लगे हैं।

सरयू नदी का पानी बढ़ने से देवारांचल के निचले क्षेत्रों में स्थिति प्रभावित हुई है। मांझा कम्हरिया और अराजी देवारा के निचले हिस्सों में पानी फैल चुका है। सिद्धनाथ की कुटी क्षेत्र के निचले खेत भी जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर पानी बंधे तक पहुंचने की स्थिति में है। ऐसे में ग्रामीण नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं। अभी तक गांव की आबादी में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। अराजी देवारा गांव के तीन पुरवे अपेक्षाकृत निचले क्षेत्र में स्थित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पानी इन पुरवों की आबादी के आसपास पहुंच सकता है।
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सरयू के बढ़ते पानी का असर कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। मांझा कम्हरिया, अराजी देवारा और सिद्धनाथ की कुटी क्षेत्र के निचले खेतों में पानी भर गया है। इन खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। इटौरा ढोलीपुर गांव के पूरब स्थित खेत भी पानी से प्रभावित हुए हैं। यहां गन्ने और धान की फसल वाले खेतों में पानी भर गया है। देवारांचल के किसानों के लिए खरीफ की फसल आय का प्रमुख जरिया है। ऐसे में खेतों में पानी भरे रहने की अवधि बढ़ने पर फसलों को नुकसान की चिंता किसानों के बीच बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में निचले क्षेत्रों में खड़ी फसल पहले ही पानी की चपेट में आ चुकी है।
अराजी देवारा गांव के तीन पुरवे निचले क्षेत्र में स्थित होने के कारण ग्रामीण विशेष रूप से जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। अभी पानी आबादी तक नहीं पहुंचा है, लेकिन बंधे तक पानी पहुंचने के बाद ग्रामीण संभावित स्थिति को लेकर सतर्क हैं। ग्रामीणों के अनुसार नदी का जलस्तर यदि लगातार बढ़ता रहा तो पानी आबादी के आसपास पहुंच सकता है। इसी वजह से जरूरी घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह स्थिति खास तौर पर उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके घर और खेत निचले इलाकों में हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार आबादी वाले हिस्सों में पानी पहुंचने की स्थिति सामने नहीं आई है। जलस्तर बढ़ने के साथ पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं। निचले इलाकों में हरा चारा और खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते पानी में डूब रहे हैं। इससे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।
ग्रामीणों ने सूखे चारे को सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में पशुओं के चारे की तत्काल समस्या न हो। खेतों और निचले रास्तों में पानी भरने से ग्रामीणों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। मांझा क्षेत्र में परवल की खेती पर भी जलस्तर बढ़ने का असर पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परवल का उत्पादन प्रतिदिन करीब 120 बोरे से घटकर 8 से 10 बोरे रह गया है।
मांझा क्षेत्र में किसानों के लिए परवल की खेती भी महत्वपूर्ण है। जलभराव की स्थिति ने इस उत्पादन को प्रभावित किया है। हालांकि उपलब्ध सूचना में फसल को हुए कुल आर्थिक नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है। बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए ग्रामीण अपने स्तर पर जरूरी तैयारियां कर रहे हैं। घरों में रखे आवश्यक सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने के साथ पशुओं के लिए सूखे चारे की व्यवस्था की जा रही है।
ग्रामीणों का मुख्य ध्यान सरयू नदी के जलस्तर पर बना हुआ है। निचले खेतों में पानी पहुंचने के बाद किसान अपनी खड़ी फसल की स्थिति पर भी नजर रख रहे हैं। फिलहाल आबादी वाले हिस्सों में पानी नहीं पहुंचा है। हालांकि नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से निचले इलाकों में पानी फैलने और अराजी देवारा के तीन पुरवों के आसपास पहुंचने की आशंका ग्रामीणों द्वारा जताई जा रही है।
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