कानपुर में शनिवार को उस समय पुलिस कमिश्नरेट परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब आईटीबीपी के 40 से 50 हथियारबंद जवान और अधिकारी अचानक परिसर पहुंच गए। जवान अपने साथी कमांडो विकास सिंह की शिकायत पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। वर्दी और हथियारों से लैस अर्धसैनिक बल के जवानों को देखकर पुलिसकर्मी सतर्क हो गए और परिसर में हलचल बढ़ गई। करीब एक घंटे तक कमिश्नरेट परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
बताया गया कि आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के इलाज में कथित लापरवाही के कारण उनका हाथ काटना पड़ा था। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। पुलिस कमिश्नर, सीएमओ और अन्य अधिकारियों के बीच लंबी बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद सीएमओ की ओर से दोबारा जांच के निर्देश जारी किए गए।
मेडिकल लापरवाही का आरोप, हाथ काटने तक पहुंचा मामला: फतेहपुर के खागा हथगाम निवासी विकास सिंह वर्तमान में कानपुर के महाराजपुर स्थित ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात हैं। विकास के अनुसार उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। उन्हें पहले आईटीबीपी अस्पताल में दिखाया गया था।
13 मई 2026 को तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। विकास सिंह एम्बुलेंस से मां को लेकर निकले, लेकिन रास्ते में भीषण जाम लगने के कारण उन्होंने टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मां के हाथ में गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद हाथ काला पड़ने लगा और सूजन बढ़ती चली गई। हालत बिगड़ने पर 14 मई की शाम उन्हें बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। विकास सिंह का आरोप है कि संक्रमण तेजी से फैलने के कारण 17 मई को डॉक्टरों को उनकी मां का हाथ काटना पड़ा।
मामले से आक्रोशित विकास सिंह 19 मई को अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए सीएमओ को भेज दिया था। इसके बाद डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई, जिसने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। हालांकि रिपोर्ट में किसी स्पष्ट निष्कर्ष का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष असंतुष्ट रहा।।
जांच रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर शनिवार को आईटीबीपी के करीब 50 जवान और अधिकारी पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए। जवान परिसर में अलग-अलग स्थानों पर खड़े हो गए और मामले में कार्रवाई की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल वार्ता शुरू की। बातचीत के बाद सीएमओ ने पूरे मामले की दोबारा जांच कराने का आश्वासन दिया।
सीएमओ हरिदत्त नेमी ने बताया कि मामले की दोबारा जांच के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में टीम गठित की गई है। टीम अस्पताल पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। उन्होंने कहा कि जांच में सभी पक्षों के बयान लिए जाएंगे और दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आईटीबीपी के लाइजनिंग ऑफिसर अर्पित सिंह ने आरोप लगाया कि कृष्णा हॉस्पिटल में पहले भी इलाज के दौरान एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के खिलाफ कई शिकायतें सामने आई हैं और इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर विपिन ताडा ने बताया कि मेडिकल लापरवाही से जुड़े मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता ने आपत्तियां जताई थीं, जिसके बाद दोबारा जांच कराने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। बातचीत के बाद आईटीबीपी के जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वापस लौट गए।
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