समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजीलाल सुमन ने बुधवार को 15 साल पुराने मामले में अलीगढ़ की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके अचानक दीवानी पहुंचने से अदालत परिसर में हलचल मच गई। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। बाद में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी।
दोपहर करीब डेढ़ बजे रामजीलाल सुमन चुपचाप दीवानी पहुंचे और एसीजेएम फर्स्ट की अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने मामला विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया। यहां दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच करीब आधे घंटे तक कानूनी बहस चली।
सांसद पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। साथ ही कहा गया कि उनके मुवक्किल ने कानून का सम्मान करते हुए स्वयं अदालत में पेश होकर जांच प्रक्रिया में सहयोग किया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने रामजीलाल सुमन को सशर्त जमानत दे दी।
2011 की जनसभा से जुड़ा है मामला: यह मामला वर्ष 2011 का बताया जा रहा है। आरोप है कि कोतवाली नगर क्षेत्र के तुर्कमान गेट स्थित सामियाना प्लाजा में प्रस्तावित जनसभा की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने प्लाजा के मुख्य गेट पर ताला भी लगा दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन सपा नेता रामजीलाल सुमन अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और गेट तोड़कर बिना अनुमति जनसभा आयोजित की। मामले में सरकारी आदेशों के उल्लंघन, तोड़फोड़ और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। लगातार गैरहाजिर रहने पर अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
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