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नई बनी 5 मंजिला इमारत अचानक बनी मलबे का ढेर, रोहिणी हादसे में 4 की मौत के बाद उठे निर्माण गुणवत्ता पर बड़े सवाल

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में नवनिर्मित पांच मंजिला इमारत गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद भवन की निर्माण गुणवत्ता, ढांचागत मजबूती और नियमों के पालन को लेकर जांच शुरू हो गई है।
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Bureau News Desk
09 Jul 2026
10:08 AM
1 min read
नई बनी 5 मंजिला इमारत अचानक बनी मलबे का ढेर, रोहिणी हादसे में 4 की मौत के बाद उठे निर्माण गुणवत्ता पर बड़े सवाल
हाइलाइट्स
रोहिणी सेक्टर-16 में नवनिर्मित पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिरी।
हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई।
घटना के समय इमारत में फिनिशिंग का कार्य चल रहा था।
ढांचागत खामी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में बुधवार शाम एक नवनिर्मित पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जबकि कई अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के समय इमारत के भीतर और आसपास मौजूद लोगों के मलबे में दबने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव अभियान कई घंटों तक जारी रहा।

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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त इमारत में फिनिशिंग का काम चल रहा था। घटना के बाद भवन की मजबूती, निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि इमारत गिरने की वास्तविक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

अधिकारियों के अनुसार, इमारत गिरने के बाद 12 से 14 लोगों के मलबे में दबने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रूप से राहत अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।घटना के बाद पूरे इलाके को घेरकर आवाजाही पर रोक लगा दी गई, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।

नगर निगम से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, इमारत का ढांचागत निर्माण लगभग तीन से चार महीने पहले पूरा हो चुका था। वर्तमान में भवन के भीतर फिनिशिंग का कार्य चल रहा था। अधिकारी ने बताया कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद किसी नई इमारत का इस तरह ढह जाना असामान्य घटना है, विशेष रूप से तब जब भवन में कोई बड़ा संरचनात्मक कार्य नहीं किया जा रहा हो।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इमारत अचानक नहीं गिरी, बल्कि पहले उसमें धंसाव दिखाई दिया और उसके बाद पूरा ढांचा भरभराकर नीचे आ गया। उनके अनुसार, इस स्थिति से प्रारंभिक तौर पर दो संभावित कारण सामने आते हैं पहला, भवन के ढांचे में तकनीकी खामी और दूसरा, निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह इमारत दो तरफ से खुली थी और दोनों ओर छज्जे भी बनाए गए थे। उनका कहना है कि भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों और तकनीकी नियमों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। घटना के बाद इलाके के लोगों ने भवन निर्माण प्रक्रिया की निगरानी और संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

फिलहाल संबंधित एजेंसियां इमारत गिरने के कारणों की जांच कर रही हैं। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा निर्माण संबंधी तकनीकी खामी, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन संबंधी त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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