तेल संकट से दुनिया में त्राहिमाम, कई देशों में आसमान छूते दाम - भारत में अब भी सबसे कम असर

पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज में तनाव से वैश्विक बाजार में उथल-पुथल, कई देशों में पेट्रोल ₹300 लीटर के करीब पहुंचा।

 

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के बीच दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। कई देशों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर अपेक्षाकृत कम देखने को मिला है।

 

भारत में बीते 10 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल करीब 4.80 रुपये से 5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है। बढ़ती कीमतों के बीच कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ी, जबकि विपक्षी दलों ने महंगाई और ईंधन दरों को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया।

 

10 दिनों में तीन बार बढ़े दाम: लंबे समय तक स्थिर रहने के बाद 15 मई 2026 को पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद 19 मई को दूसरी किश्त में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़े। फिर 23 मई को पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। तेल बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।

 

दुनिया के कई देशों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: फरवरी से मई 2026 के बीच कई देशों में पेट्रोल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार म्यांमार में सबसे अधिक 89.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान, यूएई और अमेरिका जैसे देशों में भी ईंधन की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला।

 

विभिन्न देशों में पेट्रोल कीमतों में बढ़ोतरी

 

  • म्यांमार — 89.7%
  • पाकिस्तान — 54.9%
  • यूएई — 52.4%
  • अमेरिका — 44.5%
  • नेपाल — 38.2%
  • चीन — 21.7%
  • ब्रिटेन — 19.2%
  • भारत — 5.0%

 

भारत में 76 दिनों तक नहीं बढ़े दाम: वैश्विक दबाव के बावजूद भारत में करीब 76 दिनों तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पर वित्तीय दबाव बढ़ा। सूत्रों के अनुसार तेल विपणन कंपनियों ने प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाया। इसके अलावा केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।

 

कई देशों में ₹200 से ₹300 लीटर तक पहुंची कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर यूरोप और एशिया के कई देशों में साफ दिखाई दे रहा है। लंदन में पेट्रोल की कीमत 190 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है। यूरोपीय यूनियन के कई हिस्सों में भी पेट्रोल 179 रुपये प्रति लीटर से अधिक में बिक रहा है। हांगकांग में पेट्रोल की कीमत दुनिया में सबसे ज्यादा बताई जा रही है, जहां यह लगभग 300 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है। वहीं नीदरलैंड्स में पेट्रोल करीब 2.90 अमेरिकी डॉलर प्रति लीटर बिक रहा है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 245 से 255 रुपये प्रति लीटर बैठता है।

 

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते वैश्विक ईंधन बाजार पर आने वाले दिनों में भी दबाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।


 

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