देशभर में रसोई गैस यानी एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के बीच 1 मई 2026 से गैस सिलेंडर के दामों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आयल मार्केटिंग कम्पनीज की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे उपभोक्ताओं की नजरें अगली कीमत समीक्षा पर टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खलल के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत एनर्जी ट्रांसपोर्टेशन के लिए अहम मार्ग माना जाता है। इस स्थिति का असर भारत पर भी दिखाई दे रहा है, जहां कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर की मांग बढ़ने और सीमित आपूर्ति के कारण दबाव महसूस किया जा रहा है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 196 रुपये तक का इजाफा हुआ। इससे पहले मार्च में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और इनपुट लागत में बढ़ोतरी के कारण एलपीजी की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, खासकर कमर्शियल उपयोग के लिए।
इस बीच सप्लाई प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एलपीजी बुकिंग नियमों में बदलाव किए गए हैं। अब शहरी उपभोक्ताओं को नई बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिनों का इंतजार करना होगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतराल 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। इस बिच डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है, जहां लगभग 98 प्रतिशत LPG बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है और करीब 94 प्रतिशत डिलीवरी ओटीपी या ऑथेंटिकेशन कोड के जरिए सत्यापित हो रही है। इससे पारदर्शिता और वितरण प्रणाली की निगरानी को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
सरकार ने प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों के लिए आधार आधारित ई केयावसी अनिवार्य कर दिया है, ताकि सब्सिडी का लाभ जारी रखा जा सके। इसके तहत हर वित्तीय वर्ष में एक बार सत्यापन आवश्यक है और निर्धारित सीमा के बाद अतिरिक्त जांच की जरूरत भी पड़ सकती है। इसके साथ ही जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुछ मामलों में नए एलपीजी कनेक्शन पर रोक या मौजूदा सप्लाई बंद करने जैसी शर्तें भी लागू की जा सकती हैं यदि निर्धारित समय के भीतर उपभोक्ता बदलाव नहीं करते हैं।
सप्लाई प्रबंधन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मई महीने में नियमों को और सख्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई नेशनवाइड स्तर पर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
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