प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे प्रदेश में विकास, रोजगार और निवेश को नई गति देगा तथा अन्नदाता किसानों, युवाओं और उद्योगों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए लगभग 18,000 एकड़ भूमि किसानों से प्राप्त की गई है। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब के विकास के लिए करीब 7,000 एकड़ भूमि अलग से ली गई है।
उन्होंने कहा कि मेरठ से प्रयागराज तक फैले 12 जनपदों के एक लाख से अधिक किसानों ने इस परियोजना में योगदान दिया है, जिसके लिए सरकार उनकी आभारी है। परियोजना के साथ 27 स्थानों पर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब विकसित किए जा रहे हैं। इनसे नए निवेश आकर्षित होंगे और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेसवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का इंजन है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2021 में रखी गई आधारशिला के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान भी परियोजना की गति नहीं रुकी। भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्य तक को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया। गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों को जोड़ता है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को पूर्वांचल के कृषि क्षेत्रों से जोड़ते हुए उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा।
इस एक्सप्रेसवे के संचालन से मेरठ से प्रयागराज की यात्रा 10–12 घंटे से घटकर लगभग 6–7 घंटे रह जाएगी। इससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री ने बटन दबाकर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पौधरोपण भी किया और उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें