UP News: प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को गोरखपुर के कुसम्ही जंगल स्थित वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में दीपावली मनाएंगे। मुख्यमंत्री हर साल इस गांव में पहुंचकर वनटांगिया परिवारों के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते हैं। इस बार भी उनके आगमन को लेकर गांव में उत्साह का माहौल है। ग्रामीण अपने घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट में जुटे हैं। गांव के लोग अपने प्रिय अतिथि के स्वागत की तैयारियां कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री वनटांगिया परिवारों के बीच मिठाइयां और उपहार बांटेंगे। साथ ही 82.41 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे। इनमें सड़क निर्माण, कुसम्ही जंगल में ईको पार्क और पिपराइच में वैश्विक नगर बाजार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
योगी आदित्यनाथ ने 1998 में पहली बार गोरखपुर से सांसद बनने के बाद वनटांगिया समुदाय की बदहाली को करीब से जाना। उन्होंने इस समुदाय को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का अभियान शुरू किया। वर्ष 2009 से उन्होंने वनटांगिया परिवारों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू की, जिसे मुख्यमंत्री बनने के बाद भी लगातार निभा रहे हैं। वनटांगिया समुदाय के लोग मुख्यमंत्री को प्यार से 'बाबा' कहकर बुलाते हैं। ग्रामीणों के लिए दीपावली का त्योहार उनके आगमन के बिना अधूरा लगता है।
वनटांगिया समुदाय का इतिहास ब्रिटिश शासनकाल से जुड़ा है। रेलवे स्लीपर बनाने के लिए साखू के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई के बाद अंग्रेजों ने जंगलों में नए पौधे लगाने और उनकी देखभाल के लिए गरीब मजदूरों को बसाया था। इसके लिए म्यांमार की टांगिया पद्धति अपनाई गई। इसी व्यवस्था से जुड़े लोगों को वनटांगिया कहा गया।
वर्ष 1918 में कुसम्ही जंगल के पांच क्षेत्रों में इनकी बस्तियां बसाई गईं। देश की आजादी के बाद भी इन परिवारों को लंबे समय तक नागरिक सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्हें पक्के मकान बनाने तक की अनुमति नहीं थी। आजीविका के लिए मजदूरी और जंगल से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। जंगल से बेदखली का डर भी हमेशा बना रहता था।
योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए। गोरखनाथ मंदिर और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की शुरुआत हुई। 2009 में गांव में बच्चों के लिए अस्थायी विद्यालय बनाया जा रहा था, तभी वन विभाग ने इसे अवैध बताते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में अपनी बात रखी और विद्यालय निर्माण का रास्ता साफ कराया। आज यही विद्यालय गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से संचालित है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए। उनके प्रयासों से पहले ही कार्यकाल में वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला। इससे इन गांवों के लोगों को सामान्य नागरिकों की तरह सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलने लगा। गोरखपुर और महराजगंज के 23 वनटांगिया गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, आवास, शौचालय, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं पहुंचीं। पात्र परिवारों को राशन कार्ड, आधार कार्ड, रसोई गैस और विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा।
दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री कुल 82.41 करोड़ रुपये की 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
26 परियोजनाओं का शिलान्यास: 77 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की लागत से।
26 परियोजनाओं का लोकार्पण: 4 करोड़ 43 लाख 79 हजार रुपये की लागत से।
इनमें रजही चौराहे से जंगल तिकोनिया नंबर तीन होते हुए पिपराइच मार्ग तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण प्रमुख है। इस पर 3 करोड़ 65 लाख 11 हजार रुपये खर्च होंगे। इससे ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री कुसम्ही जंगल में 4 करोड़ 84 लाख 81 हजार रुपये की लागत से बनने वाले ईको पार्क का शिलान्यास करेंगे। यहां स्विस कॉटेज समेत पर्यटकों के लिए कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा पिपराइच नगर पंचायत में 1 करोड़ 91 लाख 51 हजार रुपये की लागत से वैश्विक नगर बाजार बनाया जाएगा। इससे स्थानीय व्यापार और बाजार व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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