Sunday, 27 September 2026 | Lucknow | 29°C

बरियावन कांड: 10 गिरफ्तार, 3 जेसीबी सीज… अब जांच में किसकी भूमिका तलाश रही पुलिस?

गिरफ्तारियों और जेसीबी सीज होने के बाद जांच का फोकस उन लोगों की भूमिका पर है, जिन्होंने मशीनों और लोगों को जुटाया।
Bureau
Bureau News Desk
27 Sep 2026
01:04 PM
1 min read
बरियावन कांड: 10 गिरफ्तार, 3 जेसीबी सीज… अब जांच में किसकी भूमिका तलाश रही पुलिस?
सोर्स - संवाददाता रवि दुबे
हाइलाइट्स
बरियावन बाजार में 20 सितंबर की रात मकान-दुकानों को जेसीबी से ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया।
पुलिस ने मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
घटना में इस्तेमाल तीन जेसीबी को सीज किया गया है।
मामले में कई पुलिसकर्मियों और एक लेखपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई है।

अम्बेडकरनगर। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के बरियावन बाजार में 20 सितंबर की रात हुई कार्रवाई के बाद पुलिस और प्रशासन की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। घटना में मकान-दुकानों को जेसीबी से ढहाए जाने के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मौके पर इस्तेमाल तीन जेसीबी भी सीज की गई हैं। मामले में पुलिस और राजस्व विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। हालांकि, इन कदमों के बीच जांच अब घटना के पीछे की पूरी कड़ी को समझने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

अकबरपुर क्षेत्र के बरियावन बाजार में 20 सितंबर की रात तीन जेसीबी और बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की बात सामने आई। इसके बाद मकान और दुकानों को ध्वस्त किया गया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर मामला सामने आया और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी दी है। घटना में इस्तेमाल तीन जेसीबी को भी सीज किया गया है। पुलिस की जांच में जमीन पर कब्जे के लिए मकान-दुकानों को गिराए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरी कार्रवाई की योजना किस स्तर पर बनी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, इससे जुड़े सभी तथ्यों का निर्धारण जांच के आधार पर किया जाना बाकी है।

मामले में 10 लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का एक हिस्सा उन लोगों की पहचान और भूमिका से जुड़ा है, जो सीधे तौर पर घटना में शामिल बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाने की जरूरत है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों और तीन जेसीबी को रात के समय मौके तक कैसे जुटाया गया। जांच के लिहाज से यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जेसीबी उपलब्ध कराने के लिए किन लोगों से संपर्क किया गया था, मशीनों को किसने बुलाया और मौके पर मौजूद लोगों को किस स्तर पर संगठित किया गया। इसी तरह घटना से पहले इसकी जानकारी किन लोगों को थी और क्या किसी व्यक्ति ने पूरी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की थी, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को इस घटना का मुख्य सूत्रधार घोषित नहीं किया गया है। इसलिए पर्दे के पीछे किसी भूमिका से जुड़े सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

बरियावन मामले में कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों और जेसीबी सीज करने तक सीमित नहीं रही। घटना की जानकारी और प्रभावी पर्यवेक्षण में लापरवाही के मामले में पुलिस विभाग के कई कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई। अकबरपुर कोतवाल संतोष कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके अलावा हल्का प्रभारी उपनिरीक्षक अजय कुमार, हेड कांस्टेबल संतोष कुमार पांडेय और कांस्टेबल उपेंद्र यादव पर भी कार्रवाई हुई। राजस्व विभाग की ओर से हल्का लेखपाल रोहित लाल को निलंबित किए जाने की जानकारी है। इसके बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ा। सीओ सिटी नीतीश कुमार तिवारी को पुलिस कार्यालय से संबद्ध किया गया, जबकि अकबरपुर कोतवाली में तैनात हेड मुहर्रिर स्वप्निल सिंह को भी लाइन हाजिर किया गया। इस तरह घटना के बाद पुलिस और राजस्व विभाग के अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारी तय करने से जुड़ी कार्रवाई की गई है।

बरियावन मामले में जांच का एक अहम पहलू तीन जेसीबी का रात में मौके पर पहुंचना है। जांच में यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि इन मशीनों के मालिकों या चालकों से संपर्क किसने किया था। इसके अलावा मशीनों के इस्तेमाल से संबंधित भुगतान या अन्य व्यवस्था किसके माध्यम से हुई, इसकी जानकारी भी मामले की कड़ियों को जोड़ने में मदद कर सकती है। इसी तरह यह सवाल भी जांच का हिस्सा है कि मौके पर बड़ी संख्या में लोग किसके कहने पर पहुंचे थे और क्या घटना से पहले किसी स्तर पर इसकी तैयारी की गई थी। यदि जांच में किसी व्यक्ति की ऐसी भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा किया जा सकता है।

मामले के बीच सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल होने की बात भी सामने आई है। इसमें तीन जेसीबी और तीन लाख रुपये का जिक्र बताया जा रहा है। हालांकि, वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाजें किन लोगों की हैं और बातचीत किस वास्तविक संदर्भ में हुई थी। ऐसे में ऑडियो को फिलहाल जांच का विषय माना जाना चाहिए। इसकी रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, आवाज की पहचान और बातचीत के संदर्भ की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। यदि जांच में ऑडियो वास्तविक पाया जाता है, तो उसमें हुई बातचीत से संबंधित लोगों और लेनदेन की प्रकृति की भी पड़ताल की जा सकती है।

वायरल ऑडियो में तीन लाख रुपये के जिक्र के बाद मामले में एक अन्य सवाल रुपयों की डीलिंग से जुड़ गया है। जांच के स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि रकम का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया था। रकम किसके लिए थी, किसके बीच बातचीत हो रही थी और किसी काम के बदले भुगतान की बात थी या नहीं—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच के माध्यम से ही हो सकती है। सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो या उसमें किए गए दावों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका तय नहीं की जा सकती। इसलिए इस पहलू पर आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

घटना के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति या अधिकारी के नाम का इस्तेमाल कर कार्रवाई को अंजाम दिया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी ऐसे व्यक्ति की आधिकारिक तौर पर पहचान सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल जांच से जुड़ा सवाल ही माना जा सकता है। जांच में यदि यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति ने अपने प्रभाव, किसी अधिकारी के नाम या किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल कर मशीनों और लोगों को जुटाया, तो उसकी भूमिका भी संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय की जा सकती है। फिलहाल किसी व्यक्ति पर ऐसी भूमिका का आरोप प्रमाणित तथ्य के रूप में सामने नहीं आया है।

घटना के बाद बरियावन बाजार में पुलिस की तैनाती जारी रहने की जानकारी है। ध्वस्त मकानों और दुकानों का मलबा तथा प्रभावित परिवारों की स्थिति घटना के बाद के हालात को दर्शाती है। मामले के बाद बाजार में पुलिस चौकी खोले जाने की प्रक्रिया भी सामने आई है। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित तनाव की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाए जाने की जानकारी मिलती है। स्थानीय स्तर पर पुलिस की तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रण में रखना और किसी नए विवाद की स्थिति को रोकना बताया गया है।

बरियावन मामले में अब तक सामने आई कार्रवाई में 10 लोगों की गिरफ्तारी, तीन जेसीबी सीज किया जाना और पुलिस तथा राजस्व विभाग के कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। इसके बावजूद जांच के कई पहलू अभी स्पष्ट होना बाकी हैं। इनमें तीन जेसीबी को मौके तक पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका, घटना में शामिल लोगों को एकत्र करने की प्रक्रिया, रुपयों की डीलिंग, वायरल ऑडियो की वास्तविकता और घटना की पूर्व जानकारी रखने वाले लोगों से जुड़े सवाल शामिल हैं। इन सभी बिंदुओं पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ सकती है।

Explore Related Topics

बरियावन कांड अम्बेडकरनगर न्यूज अकबरपुर न्यूज बरियावन बाजार जेसीबी कांड उत्तर प्रदेश क्राइम न्यूज पुलिस कार्रवाई राजस्व विभाग वायरल ऑडियो यूपी न्यूज

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News